झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति की बैठक में सरकारी योजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध कार्यान्वयन पर जोर
पूर्वी सिंहभूम: झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति ने गुरुवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के सर्किट हाउस परिसदन सभागार में जिले के वरीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति और बरही विधायक मनोज यादव ने की। इस अवसर पर समिति के सदस्य विधायक सुखराम उरांव, नमन विक्सल कोंगाड़ी, अमित यादव और समीर मोहंती भी उपस्थित रहे।
बैठक में समिति ने जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं, परियोजनाओं और उनके वित्तीय प्रबंधन की विस्तार से समीक्षा की। समिति के सदस्य ने जिलास्तरीय अधिकारियों से योजनाओं की अद्यतन स्थिति, बजट की प्रगति, पारदर्शिता और जनहित को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वयन पर रिपोर्ट ली। इस दौरान यह निर्देश दिया गया कि सार्वजनिक धन का सदुपयोग करते हुए सभी योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं ताकि आम जनता को समय पर लाभ मिल सके।
बैठक में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय, डीडीसी नागेन्द्र पासवान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे। समिति ने विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2018-19 तक संचालित योजनाओं में किए गए व्यय और वित्तीय प्रबंधन की गहरी समीक्षा की।
बैठक के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रमुख योजनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि वे इन योजनाओं की शेष कार्यप्रगति में तेजी लाएं और जरूरत के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं।
सभापति मनोज यादव ने बैठक के दौरान कहा कि “लोकहित की योजनाओं में विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी से न केवल पारदर्शिता लाई जा सकती है, बल्कि क्रियान्वयन की गुणवत्ता और गति भी बेहतर होती है।” उन्होंने यह भी कहा कि लोक लेखा समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा जारी धनराशि का उपयोग न्यायोचित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया जाए।
समिति ने सभी विभागों को अपने कार्यों में अधिक तत्परता और पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन समय सीमा के भीतर और सही तरीके से किया जाए ताकि नागरिकों को लाभ मिल सके और राज्य के विकास में गति आए।
समिति की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और समुचित वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान देना राज्य की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
