JSSC CGL Exam: झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द किया सरकार का आदेश, 1932 सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
JSSC CGL 2023 News: हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने की राज्य सरकार की अधिसूचना की निरस्त, न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत का फैसला; जांच में दोषी पाए गए अभ्यर्थियों पर कार्रवाई रहेगी जारी।
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL-2023) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने शुक्रवार को 18 अगस्त 2026 को जारी राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द करते हुए करीब 1932 सफल अभ्यर्थियों को राहत प्रदान की है। इस फैसले के बाद संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां बरकरार रहेंगी।
दोषी अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी राहत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले जारी किए गए दिशा-निर्देश प्रभावी रहेंगे। जांच में जिन अभ्यर्थियों की संलिप्तता या गड़बड़ी सामने आई है, उन्हें नौकरी से बाहर रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच अंतर किए बिना पूरी परीक्षा और सभी नियुक्तियों को रद्द करना उचित नहीं है।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार या संबंधित प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकते। जांच की प्रक्रिया पूरी किए बिना सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।
पूर्व के अदालती फैसलों के विपरीत था सरकार का निर्णय
अदालत ने माना कि परीक्षा रद्द करने का राज्य सरकार का फैसला प्रकाश कुमार एवं अन्य के मामले में झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व के आदेशों के अनुरूप नहीं था। अदालतों ने पहले ही निर्देश दिया था कि जांच के आधार पर दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान की जाए और उसी के अनुसार नियुक्ति पर निर्णय लिया जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और जांच पूरी किए बिना सेवा से हटाना उचित नहीं होगा।
तीन अलग-अलग याचिकाओं पर आया फैसला
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली रमेश उरांव एवं अन्य, आकाश गौरव एवं अन्य तथा निरोज खेस एवं अन्य की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत में दलीलें पेश कीं।
सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और भ्रष्टाचार का लगाया था आरोप
मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार होने का हवाला देते हुए पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की भूमिका संदिग्ध थी और प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे।
सरकार का आरोप था कि एजेंसी के माध्यम से अभ्यर्थियों को नेपाल सहित अन्य स्थानों पर ले जाकर प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए थे। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई। सरकार ने कहा था कि जांच के दौरान गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना मुश्किल था। इसी आधार पर कैबिनेट ने पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार ने यह भी दलील दी थी कि भर्ती प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को बताया था अनुचित
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि JSSC CGL का मामला पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रह चुका था और दोनों अदालतों की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके थे।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जांच के आधार पर दोषी अभ्यर्थियों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दंडित करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को पूर्व के न्यायिक आदेशों के विपरीत बताते हुए इसे चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट के ताजा फैसले से अब JSSC CGL-2023 के करीब 1932 सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, जांच में दोषी पाए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
