धान खरीद में अनियमितता और बिचौलियागिरी बर्दाश्त नहीं होगी : मंत्री इरफान अंसारी, खेतों का होगा सत्यापन
रांची: झारखंड में धान अधिप्राप्ति व्यवस्था को पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया है कि धान खरीद में किसी भी तरह की अनियमितता और बिचौलियागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उनकी मेहनत का पूरा सम्मान सुनिश्चित करना है।
गुरुवार को मंत्री ने धान अधिप्राप्ति व्यवस्था में व्यापक बदलाव की पहल करते हुए किसानों की फसल का सही आकलन करने के लिए खेतों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत किसानों का पंजीकरण, ई-केवाईसी और अंचल कार्यालय के माध्यम से जमीन का सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले बिचौलियों पर रोक लगाने के लिए भी कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं।
धान खरीद केंद्रों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
खरीफ विपणन मौसम 2025-26 और आगामी वर्षों की धान अधिप्राप्ति योजना में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत धान खरीद केंद्रों की निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी। सभी खरीद केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव है। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्थिति में जांच की जा सके।
धान और चावल के परिवहन पर होगी GPS से निगरानी
नई व्यवस्था में धान और चावल के परिवहन को भी निगरानी के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए जीपीएस आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे परिवहन के दौरान धान और चावल की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
बकायेदार केंद्रों और विवादित राइस मिलों पर होगी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन में बकायेदार अधिप्राप्ति केंद्रों और विवादित राइस मिलों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही राज्य के बाहर स्थित राइस मिलों को धान की मिलिंग का काम नहीं देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके।
