जेएसएलपीएस भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज, झारखंड हाई कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा
रांची, 29 सितंबर: झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) में विभिन्न प्रबंधकीय पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने जेएसएलपीएस के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसके तहत 18 जनवरी 2022 के भर्ती विज्ञापन के आधार पर चल रही पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने शशि रंजन एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने या चयन के अलग-अलग चरणों में सफल होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।
6 मई 2025 के आदेश को अदालत ने रखा बरकरार
जेएसएलपीएस ने 6 मई 2025 को आदेश जारी कर 18 जनवरी 2022 के भर्ती विज्ञापन के आधार पर चल रही भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी। याचिकाकर्ताओं ने इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और भर्ती का अंतिम परिणाम जारी करने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने 24 और 25 सितंबर 2022 को आयोजित लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की थी। इसके बाद वे ग्रुप डिस्कशन (GD) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) में भी शामिल हुए थे। हालांकि, लंबे समय तक परिणाम जारी नहीं हुआ और बाद में पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई।
अभ्यर्थियों ने जताई थी आपत्ति
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं था। उन्होंने इसे मनमाना बताते हुए कहा कि इससे उनकी वैध अपेक्षा प्रभावित हुई है।
जेएसएलपीएस ने बताया प्रशासनिक कारण
जेएसएलपीएस की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित प्रबंधकीय पद विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों के तहत संविदा आधार पर एक निर्धारित अवधि के लिए सृजित किए गए थे।
भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक लंबित रहने के दौरान जोहार और एनआरईटीपी परियोजनाएं क्रमशः जून और जुलाई 2023 में पूरी हो गईं। वहीं, महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना (MKSP) और एनआरईटीपी से संबंधित परियोजनाओं के पूरा होने की सूचना ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली से भी प्राप्त हुई थी।
परियोजनाएं खत्म होने से पदों की जरूरत हुई समाप्त
अदालत ने पाया कि संबंधित परियोजनाओं के समाप्त होने के बाद उनसे जुड़े कुछ पदों पर नियुक्ति की आवश्यकता भी समाप्त हो गई थी। इसके अलावा चयन एजेंसी में बदलाव और भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक लंबित रहने को भी अदालत ने प्रासंगिक परिस्थितियों के रूप में माना।
इन परिस्थितियों के आधार पर हाई कोर्ट ने जेएसएलपीएस के भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के निर्णय को अधिकार क्षेत्र के भीतर और गैर-मनमाना माना। इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज करते हुए जेएसएलपीएस के निर्णय को बरकरार रखा।
