छल-कपट का अंधकार मिटने पर ही जीवन में उदित होता है सत्य का सूर्य : मुनिश्री नियोग सागर
दशलक्षण महापर्व में मनाया गया उत्तम सत्य धर्म, जिनालय में विशेष पूजन, शांतिधारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
रांची, 20 सितंबर। दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर रांची में विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 नियोग सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में रविवार को उत्तम सत्य धर्म श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही जिनालय में देव-शास्त्र-गुरु पूजन, दशधर्म विधान के तहत विशेष अर्घ्य समर्पण और संगीतमय आरती का आयोजन हुआ।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने कहा कि सत्य केवल मुख से शब्द बोल देना नहीं है, बल्कि मन, वचन और काय की एकरूपता ही वास्तविक सत्य है। जब मनुष्य के भीतर छल-कपट का अंधकार मिटता है, तभी सत्य का सूर्य उदित होता है। उन्होंने कहा कि वाणी हमेशा हित, मित और प्रिय होनी चाहिए। वही वचन उत्तम सत्य की श्रेणी में आता है, जो दूसरों का कल्याण करने वाला, मर्यादित और मधुर हो। अप्रिय और हिंसक सत्य भी कई बार असत्य से अधिक घातक हो सकता है।
मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने मंगल उद्बोधन में कहा कि सत्य धर्म का पालन करने के लिए क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों पर विजय पाना जरूरी है। लोभी व्यक्ति सत्य के मार्ग पर अडिग नहीं रह सकता। उत्तम सत्य धर्म व्यक्ति को कटु, कठोर, निंदापूर्ण और अप्रिय वचनों से दूर रहने तथा सत्य, न्याय और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है।
जैन मंदिर के बड़े हॉल में विद्वान प्रदीप जी शास्त्री पीयूष के मंत्रोच्चार और वाद्ययंत्रों के साथ सामूहिक पूजन संपन्न हुआ। मुख्य बेदी पर अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य आकाश कुमार, सारांश कुमार सेठी परिवार तथा पारसमल, अशोक कुमार, शरद कुमार एवं अंकित कुमार पाटोदी परिवार को प्राप्त हुआ। वासुपूज्य जिनालय में रूपचंद, ओम प्रकाश एवं चेतन कुमार छाबड़ा परिवार तथा टिकमचंद, संजय कुमार एवं सुरेंद्र कुमार छाबड़ा परिवार को शांतिधारा का सौभाग्य मिला।
सामूहिक पूजन की शांतिधारा का सौभाग्य संजय कुमार एवं शाश्वत कुमार सेठी परिवार, प्रदीप कुमार एवं सुनील कुमार पाटनी परिवार, अनिल कुमार, मनोज कुमार एवं अंकित कुमार ठोल्या परिवार तथा विजय कुमार, तन्मय कुमार एवं मुदित कुमार लहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। इस दौरान उत्तम सत्य धर्म के अर्घ्य समर्पित किये गये। इसके बाद सामूहिक रूप से तत्वार्थसूत्र का वाचन किया गया।
संध्या आरती और शास्त्र सभा के बाद जैन युवा जागृति की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘फैमिली नंबर वन’ प्रस्तुत किया गया।
21 सितंबर को सुगंध दशमी
दशलक्षण महापर्व के क्रम में 21 सितंबर को सुगंध दशमी मनायी जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि जिस प्रकार धूप की सुगंध से वातावरण पवित्र और सुगंधित होता है, उसी प्रकार सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से अशुभ कर्मों का क्षय होता है और पुण्य का बंध होता है।
समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल एवं मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा ने समाज के लोगों से दोनों जिनालयों में धूप खेने के लिए निर्धारित समय का पालन करने का अनुरोध किया है। धूप खेने का समय अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक निर्धारित है।
यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
