हजारीबाग

हजारीबाग में UPI शुल्क की खबर से व्यापारियों में चिंता

कई कारोबारियों ने ऑनलाइन भुगतान लेना बंद किया, ग्राहकों को हुई परेशानी

हजारीबाग, 18 सितंबर । दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्तूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की खबर से हजारीबाग के कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को शहर के कई बाजारों में कुछ व्यापारियों ने ऑनलाइन भुगतान लेना बंद कर दिया। इससे खरीदारी करने पहुंचे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

शहर के बड़ा बाजार, मेन रोड, इंद्रपुरी चौक, कोर्रा, झंडा चौक, जुलू पार्क सहित अन्य प्रमुख बाजारों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ज्वेलरी, मेडिकल सहित लगभग सभी कारोबारों में डिजिटल भुगतान सामान्य व्यवस्था बन चुका है। दुकानदारों ने ग्राहकों की सुविधा के लिए काउंटर और दुकानों के बाहर क्यूआर कोड लगा रखे हैं।

कारोबारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान से नकदी रखने, खुले पैसे की समस्या और बैंक में बार-बार राशि जमा करने की परेशानी कम हुई है। ऐसे में बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबर से व्यापारियों को कारोबार की लागत बढ़ने की चिंता सता रही है।

बड़े भुगतान पर लागत बढ़ने की आशंका

व्यापारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, फर्नीचर और ज्वेलरी जैसे कारोबारों में दो हजार रुपये से अधिक के बिल सामान्य हैं। यदि ऐसे प्रत्येक यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगता है, तो इसका सीधा असर कारोबारी मार्जिन पर पड़ सकता है। छोटे और मध्यम कारोबारियों का कहना है कि सीमित मुनाफे में अतिरिक्त भुगतान लागत वहन करना मुश्किल होगा।

नकदी की ओर लौटने का डर

कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक यूपीआई को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें बड़ी रकम लेकर बाजार आने की जरूरत नहीं पड़ती। यदि डिजिटल भुगतान पर कारोबारियों की लागत बढ़ती है, तो कुछ दुकानदार नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे बाजार में एक बार फिर नकदी के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई जा रही है।

शुल्क नहीं लगाने की मांग

हजारीबाग के कारोबारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए शुल्क का अतिरिक्त भार व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि भुगतान प्रणाली की लागत की भरपाई के लिए सरकार या संबंधित संस्थाएं ऐसी व्यवस्था करें, जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

व्यापारियों का यह भी कहना है कि यदि भुगतान की लागत बढ़ती है, तो लंबे समय में इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कारोबारियों ने ग्राहक सुविधा को ध्यान में रखते हुए यूपीआई भुगतान की मौजूदा सरल और कम लागत वाली व्यवस्था जारी रखने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *