Jharkhand Elephant Terror: खूंटी के गांवों में हाथियों का खौफ, रात में फसल की रखवाली कर रहे ग्रामीण
खूंटी, 03 सितंबर: कभी गांव की रातें सुकून और शांति के लिए जानी जाती थीं, लेकिन खूंटी जिले के जंगलों से सटे हाथी प्रभावित गांवों में अब शाम ढलते ही डर का माहौल बन जाता है। तोरपा, कर्रा और रनिया प्रखंड के कई गांवों में ग्रामीण रातभर जागकर अपने घर और खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं। उन्हें डर है कि जंगल से निकलकर हाथियों का झुंड कब गांव में पहुंच जाए और खेतों में तैयार फसल को बर्बाद कर दे।
रात में ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीणों के लिए रात में खेतों की रखवाली करना मजबूरी बन गया है। कोई टॉर्च लेकर गांव और खेतों के आसपास निगरानी करता है तो कई ग्रामीण समूह बनाकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
किसानों के लिए फसल का नुकसान सिर्फ आर्थिक क्षति नहीं है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेत की फसल ही परिवार की आजीविका और आने वाले महीनों की जरूरतों का प्रमुख आधार होती है। ऐसे में हाथियों के कारण फसल बर्बाद होने से उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
रनिया में करीब दर्जनभर हाथियों का झुंड सक्रिय
खूंटी जिले का रनिया प्रखंड इन दिनों हाथियों की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बताया जा रहा है। पिछले कई दिनों से करीब दर्जनभर जंगली हाथियों का झुंड गांवों और खेतों के आसपास घूम रहा है।
हाथियों की मौजूदगी ने किसानों की दिनचर्या भी बदल दी है। दिनभर खेतों में काम करने के बाद किसानों को रात में अपनी मेहनत से तैयार फसल की सुरक्षा के लिए पहरा देना पड़ रहा है।
हाथियों के गांव की ओर बढ़ते ही मचती है अफरा-तफरी
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों का झुंड जैसे ही गांव की तरफ बढ़ता दिखाई देता है, लोगों में दहशत फैल जाती है। इसके बावजूद घरों और फसलों को बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर हाथियों को गांव से दूर करने की कोशिश करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों को भगाने के दौरान उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। उनका आरोप है कि संकट के समय पर्याप्त विभागीय सहायता नहीं मिल पाने के कारण कई बार ग्रामीणों को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ता है।
जयपुर गांव में रात के समय पहुंचा हाथियों का झुंड
पिछले दो-तीन दिनों में हाथियों द्वारा किसी घर को नुकसान पहुंचाने की सूचना नहीं है, लेकिन खेतों में लगी फसलों को नुकसान जारी है। मंगलवार और बुधवार की रात जयपुर गांव में हाथियों की गतिविधि से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
बुधवार रात करीब 9 बजे हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर हाथियों को गांव से दूर केलो गांव की दिशा में खदेड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथियों को गांव से बाहर करने में सफलता मिली।
दो किसानों की फसल रौंदी
हाथियों को गांव से दूर खदेड़ने के दौरान जयपुर गांव के किसान नोएल कंडुलना और सुशील डाहंगा की फसल हाथियों के पैरों तले रौंद दी गई। इससे दोनों किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार केलो गांव के खक्सीटोली और गड़ाहातू में भी हाथियों ने कई किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
किसानों के सामने दोहरी चुनौती
हाथियों की लगातार मौजूदगी ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ उन्हें अपनी तैयार होती फसल को हाथियों से बचाना है, वहीं दूसरी ओर रात में खुद और परिवार की सुरक्षा की चिंता भी बनी हुई है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड इसी तरह गांवों और खेतों के आसपास सक्रिय रहा तो आने वाले दिनों में फसल नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।
नुकसान का आकलन और मुआवजे की मांग
विधायक प्रतिनिधि सुरेश कोगाड़ी ने बताया कि वे हाथी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी लेंगे। इसके बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर इसकी जानकारी विधायक सुदीप गुड़िया को दी जाएगी।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों से सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने के साथ ही फसल नुकसान का उचित आकलन कर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
