रांची

झारखंड को खनिज संपदा का उचित हिस्सा कब मिलेगा बताएं बाबूलाल : विनोद पांडेय

रांची, 28 अगस्त : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को लिखे पत्र पर पलटवार किया है। शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी के पत्र से स्पष्ट होता है कि उन्हें झारखंड के खनिज से अधिक चिंता खनन कंपनियों की लागत और मुनाफे की है।

पांडेय ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को खनन कंपनियों की चिंता करने के बजाय झारखंड के हित में सकारात्मक सोच के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने मरांडी के बयान को हताशा का परिचायक बताया।

झामुमो महासचिव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी राज्य सरकार से सवाल कर रहे हैं तो उन्हें भाजपा के स्तर पर केंद्र सरकार से भी पूछना चाहिए कि झारखंड को उसकी खनिज संपदा का उचित हिस्सा कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने खनिज का हिसाब और अपना अधिकार दोनों मांगेगा।

पांडेय ने सवाल उठाया कि बाबूलाल मरांडी झारखंड के नेता की तरह बात कर रहे हैं या खनन कंपनियों के प्रवक्ता की तरह। उन्होंने कहा कि कोयला और लौह-अयस्क झारखंड की महत्वपूर्ण खनिज संपदा हैं। इन पर राज्य के उचित अधिकार और राजस्व की मांग करना गलत नहीं है। उनके अनुसार, खनन से होने वाले लाभ में झारखंड की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

विनोद पांडेय ने कहा कि जो लोग खनन कंपनियों की लागत और परिवहन खर्च का हिसाब बता रहे हैं, उन्हें झारखंड की जमीन, जंगल, पानी, प्रदूषण, विस्थापन और खनन प्रभावित लोगों की कीमत का भी हिसाब बताना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब खनिज झारखंड की जमीन से निकलता है तो उसके लाभ में राज्य और यहां के लोगों की उचित हिस्सेदारी होनी चाहिए। खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के हितों को भी आर्थिक गणना में शामिल किया जाना आवश्यक है।

पांडेय ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की राशि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के हितों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र से झारखंड के हिस्से के पैसे और अधिकार मिलने को लेकर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों को लेकर अपने अधिकारों की मांग करता रहेगा और खनिज संपदा से मिलने वाले लाभ में राज्य की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भाजपा और झामुमो के बीच खनिज राजस्व तथा राज्य के अधिकारों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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