बोकारो की लापता युवती मामले में हाई कोर्ट सख्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट 10 दिन में तलब
रांची, 17 अगस्त । बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें आईजी, डीआईजी और बोकारो एसपी शामिल हैं, का तबादला किया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे लापरवाही के लिए दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर मामले की निगरानी में लापरवाही के आरोप हैं, उनके खिलाफ वास्तविक अनुशासनात्मक अथवा विभागीय कार्रवाई क्या की गई है।
सिर्फ तबादले को कार्रवाई नहीं मान सकती अदालत
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले की जानकारी दिए जाने पर अदालत ने इसे पर्याप्त कार्रवाई मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी का तबादला अपने आप में दंडात्मक कार्रवाई नहीं है।
अदालत ने राज्य सरकार को 10 दिन का समय देते हुए निर्देश दिया कि वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई वास्तविक कार्रवाई और विभागीय कार्यवाही की वर्तमान स्थिति से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे।
28 पुलिसकर्मी हो चुके हैं निलंबित
इस मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि संबंधित थाना के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। इनमें चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चल रही है।
हालांकि, अदालत ने इस पर सवाल उठाया था कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक ही क्यों सीमित है। कोर्ट ने मामले की निगरानी और जांच के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी जवाब मांगा था।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर कोर्ट की नजर
मौजूदा सुनवाई में अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि मामले की जांच और युवती की तलाश में यदि वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से भी लापरवाही हुई है, तो उनके खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत का जोर इस बात पर है कि केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। जिम्मेदारी तय करते हुए प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की भूमिका की जांच आवश्यक है।
DNA जांच रिपोर्ट भी SIT को सौंपी गई
मामले की पिछली सुनवाई में कोलकाता स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) से प्राप्त लापता युवती के माता-पिता के डीएनए सैंपल की जांच रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी गई थी।
अदालत ने राज्य सरकार को लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और उनके विरुद्ध चल रही विभागीय कार्यवाही की वर्तमान स्थिति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने का निर्देश दिया था।
31 जुलाई 2025 से लापता है युवती
यह मामला युवती की मां रेखा देवी की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। 18 वर्षीय युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। उसके लापता होने के संबंध में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था।
लंबे समय तक युवती का पता नहीं चलने और पुलिस जांच में कथित लापरवाही के आरोपों के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत लगातार मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस और राज्य सरकार से कार्रवाई तथा जांच की प्रगति का ब्यौरा मांग रही है।
10 दिन में देना होगा विस्तृत जवाब
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और अधिवक्ता शांतनु गुप्ता ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
अब राज्य सरकार को अगले 10 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या वास्तविक अनुशासनात्मक या विभागीय कार्रवाई की गई है और यदि विभागीय कार्रवाई लंबित है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
