JPSC-JSSC विवाद: छात्रों का आंदोलन 24वें दिन भी जारी, वार्ता से पहले बाबूलाल मरांडी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
रांची, 17 अगस्त । झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच सोमवार दोपहर दो बजे प्रस्तावित वार्ता को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की निगाहें टिकी हैं।
वार्ता से पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से परीक्षा विवाद से जुड़े कई सवाल पूछे। उन्होंने सरकार से कथित अनियमितताओं के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य आरोपित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जेपीएससी अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी-सीजीएल विवाद का जिक्र करते हुए प्रभारी चेयरमैन आईएएस प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से जुड़े तथ्यों और आरोपों के बावजूद सरकार न्यायालय के आदेश की व्याख्या के आधार पर परीक्षा रद्द करने में असमर्थता जता रही है, तो संबंधित अधिकारियों को पद से हटाने, प्राथमिकी दर्ज कराने और विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई करने में क्या परेशानी है।
उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखने की मांग की।
नीरज सिन्हा को लेकर भी सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने जेएसएससी से जुड़े मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इसकी तुलना जेपीएससी प्रकरण में इस्तीफा देने वाले ख्यांगते के खिलाफ हुई कार्रवाई से की।
मरांडी ने पूछा कि दोनों मामलों में कार्रवाई का अलग-अलग पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों की सेवा पृष्ठभूमि के आधार पर कार्रवाई में अंतर किया जा रहा है।
वायरल नामों की जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में कथित तौर पर वायरल हो रहे 10-12 नामों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि इन लोगों पर पैसे देकर नौकरी हासिल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो सरकार को इन आरोपों की जांच करानी चाहिए।
उन्होंने संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने, आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पद से हटाने और आरोप सही पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
सीबीआई जांच की मांग
मरांडी ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।
उनके अनुसार, सरकार को आंदोलन समाप्त कराने के प्रयास के बजाय छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
आज की वार्ता पर टिकी नजरें
इधर, आंदोलनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच सोमवार दोपहर दो बजे प्रस्तावित वार्ता को आंदोलन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराना और जांच सीबीआई को सौंपना शामिल है।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने के लिए पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। वहीं सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि विवाद के समाधान की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
24वें दिन भी जारी आंदोलन के बीच अब सभी की निगाहें सरकार और छात्रों के बीच होने वाली वार्ता के नतीजे पर टिकी हैं।
