JPSC-JSSC विवाद: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दी अपने बयान पर सफाई, कहा— “मेरी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया”

रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। इस बीच, राज्य सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के एक बयान पर मचा सियासी बवाल अब सफाई और स्पष्टीकरण तक पहुंच गया है। मंत्री ने अपने बयान का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया और छात्र नेता रविंद्र पासवान उनकी बात का सही अर्थ नहीं समझ सके।
12 अगस्त की मुलाकात का दिया हवाला
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने पूरे मामले पर स्थिति साफ करते हुए 12 अगस्त की घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दिन वह रांची सदर अस्पताल गई थीं, जहां आंदोलन के दौरान घायल और बीमार हुए अनशनकारी छात्रों का इलाज चल रहा था।
अस्पताल में अनशनकारी छात्रों से मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया के सामने प्रतिनिधिमंडल (Delegation) को लेकर एक बयान दिया था।
“12 अगस्त को मीडिया के सामने मैंने स्पष्ट कहा था कि सरकार के प्रतिनिधियों से वार्ता करने जो छात्र-छात्राओं का डेलीगेशन गया था, उसमें एक भी अनशनकारी छात्र शामिल नहीं था। मेरे इस बयान का मकसद सिर्फ डेलीगेशन की स्थिति को स्पष्ट करना था।” — शिल्पी नेहा तिर्की, मंत्री
“सोशल मीडिया पर फैलाया गया भ्रम”
मंत्री ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके बयान को मूल संदर्भ से काटकर और अलग करके पेश किया जा रहा है। इसी कारण छात्रों और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने दोहराया कि वह अपनी बात पर कायम हैं और उनके कहने का गलत अर्थ निकाला गया।
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच बढ़ी सियासी हलचल
झारखंड में 14वीं JPSC और JSSC-CGL समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने, पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराने और आयोग में व्यापक सुधार की मांग को लेकर अभ्यर्थी कई दिनों से सत्याग्रह और अनशन पर डटे हुए हैं।
एक तरफ जहां छात्र सरकार से सीधी वार्ता और ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मंत्री के इस बयान ने मामले को और हवा दे दी थी।
अब आगे क्या?
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की द्वारा सफाई दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें आंदोलनकारी छात्र संगठनों और छात्र नेताओं की अगली प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मंत्री के इस स्पष्टीकरण के बाद यह विवाद यहीं थमता है या JPSC-JSSC आंदोलन में यह मुद्दा नया मोड़ लेता है।
