JPSC-JSSC प्रदर्शन: 8वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास नए स्थल पर बैठे अभ्यर्थी

रांची | 01 अगस्त:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली व अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखने के संकल्प के साथ छात्रों ने अपना धरना स्थल बदल लिया है और किसी भी राजनीतिक दल से दूरी बना ली है।
🚫 “नेताओं की नो एंट्री”: छात्रों ने राजनीति से बनाई दूरी
शुक्रवार को धरना स्थल पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी जब कुछ छात्र नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े प्रतिनिधियों ने मंच से भाषण देने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद अभ्यर्थियों ने सख्त रुख अपनाया।
छात्रों का स्पष्ट संदेश:
“यह आंदोलन विशुद्ध रूप से छात्रों का है। हम किसी भी राजनीतिक दल या नेता को अपना मंच साझा नहीं करने देंगे। नैतिक समर्थन देने वालों का स्वागत है, लेकिन आंदोलन की कमान और मंच केवल छात्रों के पास ही रहेगा।”
☀️ कड़क धूप और जमीन पर दरी: अनुमति न मिलने पर भी डटे अभ्यर्थी
राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने के लिए अधिकांश अभ्यर्थियों ने पुराना धरना स्थल छोड़ दिया और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के दूसरे गेट के पास नया ठिकाना बनाया।
- प्रशासन की रोक: प्रशासन का कहना है कि नए स्थान के लिए अभी आधिकारिक अनुमति जारी नहीं हुई है, इसलिए वहां टेंट या अस्थायी ढांचा लगाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
- छात्रों का जज्बा: टेंट की अनुमति न मिलने के बावजूद अभ्यर्थी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वे तेज धूप में जमीन पर दरी बिछाकर ही अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
🍲 खुद का खाना, खुद का फंड: चंदे और ऑनलाइन सपोर्ट से चल रही रसोई
आंदोलन को आत्मनिर्भर बनाए रखने के लिए छात्र भोजन की व्यवस्था भी खुद ही कर रहे हैं:
- अभ्यर्थी आपस में ही सहयोग राशि एकत्र कर भोजन का प्रबंध कर रहे हैं।
- देश-प्रदेश से समर्थन दे रहे लोग ऑनलाइन माध्यमों से भोजन और जरूरी सामग्री भेज रहे हैं।
- प्रशासन द्वारा धरना स्थल पर खाना बनाने की अनुमति न होने के कारण बाहर से पैक्ड भोजन मंगाकर वितरित किया जा रहा है।
📍 पुराने धरना स्थल पर बचे केवल कुछ लोग
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, पुराने धरना स्थल पर अब गिने-चुने लोग ही बचे हैं, जो विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। वहीं, वास्तविक छात्र आंदोलन का हिस्सा बनने वाले अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या नए स्थान पर एकजुट होकर अपनी लड़ाई लड़ रही है।
