अवैध वाहन नीलामी मामले में सुनवाई पूरी, उच्च न्यायालय ने आदेश रखा सुरक्षित

रांची, 15 जुलाई । झारखंड में खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नीलामी की गई गाड़ी वापस ले ली गई है, याचिकाकर्ता को उसकी गाड़ी वापस लेने के लिए नोटिस किया गया, लेकिन वह अभी तक नहीं आए।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने पक्ष रखा। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार को एक माह का समय प्रदान करते हुए मुख्य सचिव को भी इस मामले को देखने को कहा था। इस मामले में पूर्व में लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे। अदालत ने उनसे मौखिक कहा था कि आपके कारण जो समस्या पैदा हुई है, उसका निदान क्यों अब तक नहीं निकला।
अवैध खनन के परिवहन में पकड़े गए वाहन की जब्ती के बाद जल्दीबाजी में उसकी नीलामी कर उसे तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया गया। जबकि इससे संबंधित मामले में रिवीजन याचिका लंबित है। प्रार्थी को उस मौका दिए बिना उनके वाहन की नीलामी का बेचने में जल्द क्यों कर दी गई। सुनवाई के दौरान लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार अदालत में सशरीर उपस्थित हुए थे।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी की हाईवा गया जिला से चोरी हो गया है, जहां उन्होंने इसे लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। बाद में यह हाईवा अवैध माइनिंग के परिवहन के दौरान बालूमाथ में पकड़ा गया था। लातेहार के तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव ने उस पकड़े गए हाईवा की जब्ती कर जल्दीबाजी में नीलामी की प्रक्रिया शुरू की और उसे किसी तीसरे पक्ष को वाहन को काफी सस्ते मूल्य पर बेच दिया था।
