साहित्य संगम संस्थान का 10वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न

रांची/जबलपुर/नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल माध्यम से हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार में सक्रिय साहित्य संगम संस्थान का 10वां स्थापना दिवस उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। उमरिया से संस्थान के संयोजक अनुज नवीन कुमार भट्ट के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकारों और पदाधिकारियों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 10 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने साहित्य सेवा के प्रति समर्पण और डिजिटल मंचों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं का डिजिटल विमोचन रहा। साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुब्रत एवं उनके शिष्यों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रांची से संस्थान के परामर्शदाता एवं पूर्व डीआईजी डॉ. प्रशांत करण ने ऑनलाइन जुड़कर साहित्यिक प्रस्तुति देने के साथ संस्थान के प्रशासनिक और तकनीकी विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जबलपुर से संस्थान की कोषाध्यक्षा छाया सक्सेना ‘प्रभु’ ने भी संगठन को और सशक्त बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। नई दिल्ली से वैज्ञानिक एवं परामर्शदाता मंडल के सदस्य रमन ध्यानी की उपस्थिति भी कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही।
‘क्या खोया, क्या पाया‘ विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में देशभर के साहित्यकारों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान लगभग 40 वीडियो एवं लाइव प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गईं, जबकि 100 से अधिक रचनाकारों ने अपनी लिखित रचनाएं भेजीं।
समारोह के अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय संयोजक तथा सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने एक-दूसरे को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए हिंदी साहित्य की समृद्धि और संस्थान के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प दोहराया।
