RIMS में 60 टीबी मरीजों के बीच पोषण किट का वितरण
निक्षय पोषण योजना के तहत CMPDIL और आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर की पहल
रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सोमवार को ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर 60 टीबी (क्षयरोग) मरीजों के बीच पोषण किट का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम CMPDIL के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम तथा आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर जोर
कार्यक्रम का आयोजन जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. सिद्धेश्वर बास्की के नेतृत्व में तथा टीबी एंड चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया। डॉट्स केंद्र के प्रभारी डॉ. टी.के. मिश्रा ने मरीजों के बीच पोषण किट का वितरण किया।
इस अवसर पर बताया गया कि आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर द्वारा पिछले पांच महीनों से जिले के कुल 1550 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध कराई जा रही है।
टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को मिलेगा बल
संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों को उचित पोषण उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया को तेज करना तथा ‘टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प को साकार करने में सहयोग देना है। उन्होंने कहा कि उपचार के साथ-साथ संतुलित पोषण भी टीबी मरीजों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सामूहिक प्रयास से सफल हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम को सफल बनाने में CMPDIL, आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर तथा रिम्स के स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर दीपक कुमार, गुड्डू ठाकुर और उत्सव राज सहित संस्थान के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रिम्स डॉट्स सेंटर की ओर से टीबीएचवी संजय कुमार झा, बसंत भगत, एएनएम बेबी, लैब टेक्नीशियन राजवंश राम, अंजना मेरी टोप्पो, वेरोनिका तिग्गा एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्यक्रम के संचालन और समन्वय में सक्रिय योगदान दिया।
ऐसी पहलें टीबी उन्मूलन में सहायक : डॉ. टी.के. मिश्रा
डॉट्स केंद्र के प्रभारी डॉ. टी.के. मिश्रा ने CMPDIL और आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में पोषण सहायता योजनाएं और विभिन्न संस्थाओं का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास मरीजों के उपचार और स्वास्थ्य सुधार में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।
