संविधान आमजन की सुरक्षा का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज : न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक
आईएएल झारखंड चैप्टर की राज्यस्तरीय संगोष्ठी में संविधान की प्रस्तावना, नागरिक अधिकारों और अधिवक्ता संरक्षण पर हुआ मंथन
रांची। इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (आईएएल) झारखंड चैप्टर एवं हॉफमैन लॉ एसोसिएट्स के तत्वावधान में रविवार को भारतीय संविधान की प्रस्तावना एवं नागरिक विषय पर राज्यस्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पुरुलिया रोड स्थित एक्सआईएसएस सभागार में आयोजित एकदिवसीय सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ के साथ हुआ। कार्यक्रम में राज्यभर से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
संविधान नागरिक अधिकारों का सबसे मजबूत आधार : एडवोकेट जनरल
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राज्य के एडवोकेट जनरल रोहिताश्व राय ने कहा कि भारतीय संविधान आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि देश के अनेक प्रतिष्ठित विधिवेत्ताओं ने संविधान के माध्यम से नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने का कार्य किया है। संविधान की प्रस्तावना ही सभी मौलिक अधिकारों की आधारशिला है।
संविधान की प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं हो सकती : न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक
झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक ने कहा कि संविधान देश की स्वतंत्रता से लेकर आज तक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा उसी दृढ़ता से कर रहा है, जैसे सीमा पर सैनिक देश की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और साइबर सुरक्षा के दौर में भी संविधान की मूल भावना पूरी तरह प्रासंगिक है।
उन्होंने केशवानंद भारती मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना कभी पुरानी नहीं हो सकती। इसे अप्रासंगिक बताने की धारणा पूरी तरह गलत है। न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों का जीवन सदैव समाज और आम नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित रहता है।
‘रांची डिक्लेरेशन-2026’ की घोषणा, अधिवक्ता संरक्षण कानून की मांग
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य एवं आईएएल के सचिव एडवोकेट ए.के. रसीदी ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना देश के सामूहिक संकल्प की घोषणा है। उन्होंने अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 का उल्लेख करते हुए कहा कि ये नागरिकों के मौलिक अधिकारों की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं।
उन्होंने इस अवसर पर “रांची डिक्लेरेशन-2026” की घोषणा करते हुए विधानसभा एवं संसद से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट पारित कराने की मांग की। साथ ही जूनियर अधिवक्ताओं के आर्थिक संरक्षण, मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता भी बताई।
संविधान ही समाज की एकता और सुरक्षा की गारंटी : न्यायमूर्ति रत्नाकर भेंगरा
झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रत्नाकर भेंगरा ने कहा कि संविधान समाज के सभी वर्गों, जातियों, धर्मों और समुदायों की सुरक्षा की गारंटी है। उन्होंने कहा कि संविधान पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। संविधान ही देश के सम्मान और सामाजिक एकता का सबसे मजबूत आधार है।
वकीलों की भूमिका न्याय व्यवस्था की रीढ़ : हफीजुल हसन
राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए स्वास्थ्य बीमा सहित कई योजनाएं लागू कर चुकी है तथा भविष्य में भी उनके हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
संविधान की मूल भावना समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे : संजय विद्राही
रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्राही ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि संविधान की मूल भावना समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने न्याय, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को व्यवहार में उतारने पर बल देते हुए कहा कि वकालत को समाज सेवा का सशक्त माध्यम बनाना समय की आवश्यकता है।
राज्यभर के अधिवक्ताओं ने की सहभागिता
संगोष्ठी में हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, मेदिनीनगर, रामगढ़, गिरिडीह सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए अधिवक्ताओं ने संविधान, नागरिक अधिकार, अधिवक्ताओं के कल्याण, संरक्षण तथा न्याय तक समान पहुंच जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान बार काउंसिल एवं विभिन्न संस्थाओं के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।
