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उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, JSOU-CEMCA की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार बोले- विद्यार्थियों को डिग्री के साथ कौशल, नवाचार और रोजगार क्षमता से भी करना होगा सशक्त

रांची, 24 जून। झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय (JSOU), रांची एवं कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (CEMCA), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “स्नातक रोजगारोन्मुखता एवं परिणाम-आधारित प्रबंधन रूपरेखा” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ बुधवार को रांची स्थित होटल हॉलिडे होम में हुआ। कार्यशाला में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख, कौशल-आधारित एवं परिणाम-केंद्रित बनाने पर विशेष चर्चा की गई।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव पर जोर

कार्यशाला का उद्घाटन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।

परिणाम आधारित शिक्षा से बढ़ेगी गुणवत्ता

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अभय कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों और रोजगार क्षमता के आधार पर किया जा रहा है। परिणाम-आधारित प्रबंधन प्रणाली संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुधार का प्रभावी माध्यम है।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. राजेश पी. खंबायत ने उद्योग-अकादमिक समन्वय, कौशल आधारित शिक्षण, अधिगम परिणामों के मूल्यांकन और संस्थागत विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, CEMCA के निदेशक डॉ. बशीरहमद शाद्राच ने ऑनलाइन संबोधन के माध्यम से डिजिटल शिक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और परिणाम-आधारित मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया।

तकनीकी सत्रों में हुआ गहन मंथन

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में स्नातक विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, उद्योग-अकादमिक साझेदारी, उद्यमिता विकास, डिजिटल शिक्षा, संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन तथा परिणाम-आधारित प्रबंधन ढांचे पर व्यापक चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों में संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान क्षमता, नेतृत्व गुण, डिजिटल साक्षरता और नवाचार की भावना विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिक्षाविदों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, प्राचार्यों, शिक्षकों और शिक्षा प्रशासकों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. वासुदेव प्रसाद, डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. सुबोध कुमार सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे। वहीं झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के शिक्षक एवं अधिकारी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. जे.के. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यशाला झारखंड में उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, कौशल-आधारित, नवाचारी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा इससे प्राप्त सुझाव भविष्य की शिक्षा नीतियों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

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