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एशिया कप में कांस्य पदक जीतकर लौटीं सिमडेगा की बेटियां, आसनबेड़ा गांव में आदिवासी परंपरा से हुआ भव्य स्वागत

सिमडेगा, 11 जून 2026: जापान में आयोजित अंडर-18 महिला एशिया कप हॉकी प्रतियोगिता में भारतीय टीम के साथ कांस्य पदक जीतकर लौटीं सिमडेगा की बेटियां पुष्पा मांझी और संदीपा कुमारी का सम्मान समारोह लगातार जारी है। देश की राजधानी दिल्ली, रांची और सिमडेगा जिला मुख्यालय में स्वागत के बाद अब पुष्पा मांझी के जन्मस्थल कुरडेग प्रखंड के आसनबेड़ा गांव में उनका पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया।

29 मई से 6 जून 2026 तक जापान में आयोजित अंडर-18 महिला एशिया कप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में सिमडेगा की दोनों खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मोटरसाइकिल रैली के साथ गांव पहुंचीं खिलाड़ी

आसनबेड़ा गांव में स्वागत के लिए ग्रामीणों और गोंडवाना आदिवासी कल्याण एवं विकास मंच के पदाधिकारियों ने विशेष तैयारी की थी। गांव के युवाओं ने सिमडेगा-कुरडेग मुख्य मार्ग से ही दोनों खिलाड़ियों को मोटरसाइकिल रैली के साथ गांव के खेल मैदान तक पहुंचाया।

यही वह मैदान है जहां से पुष्पा मांझी ने हॉकी खेलना शुरू किया था। मैदान पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, खेल प्रेमी और महिलाएं पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में मौजूद थीं। खिलाड़ियों के साथ उनके कोच तारिणी कुमारी, हॉकी झारखंड के उपाध्यक्ष मनोज कोनबेगी और कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, बुके और पौधा भेंट कर सम्मान किया गया।

गांव के मैदान से शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय सफर की कहानी

आसनबेड़ा गांव के स्कूल मैदान से शुरू हुई पुष्पा मांझी की हॉकी यात्रा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। इसी मैदान पर आयोजित गोंडवाना विकास मंच की खेल प्रतियोगिताओं के दौरान उनकी प्रतिभा को पहचान मिली थी। इसके बाद उन्होंने गोंडवाना खेल छात्रावास, लचरागढ़ हॉकी सेंटर और फिर सेंटर फॉर एक्सीलेंस तक का सफर तय किया।

पुष्पा वर्तमान में कोच तारिणी कुमारी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इसी मैदान से निकलीं पुनीता मांझी और रीमा कुमारी भी हॉकी प्रशिक्षण ले रही हैं। पुनीता कई बार झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

कुरडेग की पहली अंतरराष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं पुष्पा

हॉकी झारखंड के उपाध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने कहा कि कुरडेग प्रखंड ने देश को कई बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। वर्ष 1975 में विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित जैसे महान खिलाड़ी इसी क्षेत्र से निकले हैं।

उन्होंने कहा कि अब तक कुरडेग प्रखंड से कोई महिला अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नहीं बनी थी, लेकिन पुष्पा मांझी ने अंडर-18 एशिया कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर इस उपलब्धि को हासिल किया है। इससे क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

परिवार ने जताया गर्व

पुष्पा की मां हीरामणि देवी ने भावुक होकर कहा कि शुरुआत में वह बेटी को पढ़ाई छोड़कर खेलने जाने पर डांटती थीं, लेकिन आज उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी भारतीय टीम का हिस्सा बनकर गांव और देश का नाम रोशन कर रही है।

वहीं संदीपा कुमारी के पिता रंजीत मांझी ने बताया कि सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उनकी बेटी ने मेहनत नहीं छोड़ी और आज भारतीय टीम तक पहुंचकर परिवार का सपना पूरा किया है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम का संचालन गोंडवाना विकास मंच के संरक्षक एवं हॉकी सिमडेगा के कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी ने किया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी से निकलकर खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं, उसी धरती पर उनका सम्मान होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष रामचंद्र मांझी ने की। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

समारोह में हेठमा पंचायत की मुखिया सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, खेल प्रेमी और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्य बिंदु

  • जापान में आयोजित अंडर-18 महिला एशिया कप में भारत ने जीता कांस्य पदक।
  • सिमडेगा की पुष्पा मांझी और संदीपा कुमारी भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।
  • आसनबेड़ा गांव में आदिवासी परंपरा के साथ हुआ भव्य स्वागत।
  • पुष्पा मांझी कुरडेग प्रखंड की पहली अंतरराष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं।
  • खिलाड़ियों की सफलता से क्षेत्र की नई पीढ़ी को मिली प्रेरणा।

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