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हीट वेव का नया चेहरा: दिन के बाद अब रातें भी बनीं चुनौती, क्या तैयार है भारत

Ranchi: सूरज ढलने के बाद भी गर्मी से राहत न मिलना अब एक नई और डरावनी हकीकत बन चुका है। दिन के समय की झुलसाने वाली धूप का असर अब आधी रात तक बरकरार रहता है, जिससे घरों की दीवारें तपी रहती हैं और पंखे व कूलर की हवा भी बेअसर हो रही है। वैज्ञानिक इस स्थिति को वार्म नाइट्स कहते हैं, जहाँ न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक पहुँचने लगा है। आज देश का 55 फीसदी हिस्सा हाई हीट रिस्क जोन में आ चुका है, लेकिन इस बढ़ते संकट के बीच इन गर्म रातों के प्रति बरती जा रही लापरवाही गंभीर परिणाम दे रही है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन और बेतहाशा शहरीकरण के दोहरे प्रभाव के कारण भारत की रातें लगातार गर्म होती जा रही हैं और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भी देश के अधिकांश हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म रातों का पूर्वानुमान जताया है।

आंकड़ों पर गौर करें तो साइंस डायरेक्ट 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 1980 से 2020 के बीच गर्म रातों की संख्या में हर दशक 2 से 8 दिनों की वृद्धि हुई है। वहीं, काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर के आंकड़ों के मुताबिक 2012 से 2022 के बीच शहरी इलाकों में यह प्रभाव सबसे ज्यादा दिखा, जहाँ मुंबई में 15, बेंगलुरु में 11 और दिल्ली में 6 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज की गईं। पिछले एक दशक में भारत के शहरों में ऐसी गर्म रातों में 32 फीसदी का उछाल आया है, और चूँकि 2026 एक अल नीनो वर्ष है, इसलिए 2027 की गर्मी और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है। भारत के 266 जिले इस वक्त गंभीर गर्मी की चपेट में हैं।

मौजूदा समय में भारत का हीट ऐक्शन प्लान मुख्य रूप से दिन की गर्मी पर केंद्रित है, जबकि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित क्षेत्र और कंक्रीट के जंगलों द्वारा सोखी गई गर्मी के कारण ये रातें अब जानलेवा साबित हो रही हैं। वर्तमान में दुनिया का तापमान सामान्य से 1.44 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है और अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला समय पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। इस समस्या से निपटने के लिए इमारतों में कूल रूफ तकनीक को अपनाना, शहरी नियोजन के जरिए वेंटिलेशन कॉरिडोर बनाना, सड़कों के लिए रिफ्लेक्टिव मटेरियल का उपयोग करना और वृक्षारोपण को बड़े स्तर पर बढ़ाना अनिवार्य है। जब तक भारत अपने हीट ऐक्शन प्लान में रात के बढ़ते तापमान को गंभीरता से शामिल नहीं करता, तब तक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों का खतरा बना रहेगा।

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