मैथिली साहित्य के लिए बड़ी खुशखबरी : ‘शकुंतला-भुवनेश्वरी पुरस्कार’ से नवाजे जायेंगे कवि बुद्धिनाथ झा को मिलेगा

Ranchi : मैथिली साहित्य जगत के लिए यह गर्व का पल है। वरिष्ठ कवि और लेखक बुद्धिनाथ झा को साल 2026 का प्रतिष्ठित ‘शकुंतला-भुवनेश्वरी पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई है। हैदराबाद स्थित शकुंतला भुवनेश्वरी मैथिली-संस्कृत संवर्द्धन न्यास ने यह फैसला लिया है। इस पुरस्कार के तहत बुद्धिनाथ झा को एक लाख रुपए, शॉल और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। न्यास हर साल यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में खास योगदान देने वाले रचनाकारों को देता है।
क्यों चुने गए बुद्धिनाथ झा
तीन सदस्यीय चयन समिति ने बताया कि बुद्धिनाथ झा मैथिली के ऐसे लेखक हैं जो गद्य और पद्य दोनों में बराबर पकड़ रखते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने महाभारत जैसे बड़े शास्त्रीय ग्रंथ को भी मैथिली में बेहद सहज और भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी में परंपरा और आधुनिकता दोनों का अच्छा मेल देखने को मिलता है।
बोकारो से रांची तक की पहचान
बुद्धिनाथ झा का पैतृक घर बिहार के मधुबनी जिले के नागदह में है। वे झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट में नौकरी कर चुके हैं। अब सेवानिवृत्ति के बाद पूरी तरह साहित्य साधना में जुटे हुए हैं और लगातार लिख रहे हैं।
साहित्य जगत में खुशी की लहर
इस घोषणा के बाद रांची और आसपास के साहित्यकारों में खुशी का माहौल है। रांची विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र झा, दूरदर्शन रांची के पूर्व निदेशक प्रमोद कुमार झा, कृष्णमोहन झा, बदरीनाथ झा, अमरनाथ झा, डॉ. महेंद्र, सुभाष चंद्र यादव, केदार कानन, सुस्मिता पाठक, किसलय कृष्ण, डॉ. संजय वशिष्ठ और आशीष चमन समेत कई लोगों ने उन्हें बधाई दी है।
पहले भी मिल चुका है कई नामों को सम्मान
यह पुरस्कार पहले भी मैथिली के कई दिग्गज साहित्यकारों को मिल चुका है। इनमें महेंद्र, शिवशंकर श्रीनिवास, अशोक, जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल, सुभाष चंद्र यादव, सुस्मिता पाठक और वीरेंद्र मल्लिक जैसे नाम शामिल हैं।
साधारण समारोह में होगा सम्मान
न्यास की ओर से बताया गया है कि यह सम्मान एक सादे समारोह में दिया जाएगा। मुख्य न्यासी चंद्र मोहन कर्ण ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि बुद्धिनाथ झा का योगदान मैथिली भाषा और साहित्य के लिए बेहद अहम है।
