झारखंड निकाय चुनाव में कई जगहों पर सैकड़ों वोट अमान्य, बैलेट पेपर से वोटिंग ने पैदा किया भ्रम

Ranchi : झारखंड में निकाय चुनाव के मतगणना के दौरान कई जगहों पर बड़ी संख्या में वोट अमान्य कर दिए गए। राज्य में लंबे समय बाद बैलेट पेपर से मतदान हुआ था, लेकिन इस बार तकनीकी और मतदाता जागरूकता की कमी के कारण कई वोट रिजेक्ट हुए।
गुमला में सबसे ज्यादा वोट अमान्य
गुमला नगर परिषद में कुल 3,654 वोट अमान्य घोषित किए गए। इनमें अध्यक्ष पद के लिए 1,925 और वार्ड पार्षद के लिए 1,729 वोट शामिल हैं। कारण था कि मतदाताओं ने बैलेट पेपर पर सही तरीके से हस्ताक्षर या अंगूठा नहीं लगाया, या मुहर सही जगह नहीं लगाई।
अन्य नगर निगम और परिषदों में भी दर्ज हुई बड़ी संख्या में अमान्य वोट
धनबाद नगर निगम : चौथे राउंड तक 15,071 वोट रिजेक्ट।
देवघर नगर निगम : कुल 6,114 वोट अमान्य।
चास नगर निगम : कुल 5,258 वोट अमान्य, कुल वैध मत 77,053।
मेदिनिनगर नगर निगम : कुल 4,398 वोट अमान्य।
राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी राज्य स्तर पर कुल अमान्य वोटों का आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन सभी निकायों से मिली रिपोर्ट्स में सैकड़ों रिजेक्ट वोट सामने आए हैं।
तकनीकी वजहें और मतदाता भ्रम
2013 के बाद पहली बार बैलेट पेपर से चुनाव होने के कारण कई तकनीकी गलतियां सामने आईं :
सही जगह पर मुहर/हस्ताक्षर/अंगूठा न लगाना।
एक से अधिक निशान लगाना।
महापौर/अध्यक्ष और पार्षद दोनों पदों के लिए एक ही पेपर पर गलत मतदान।
NOTA विकल्प की अनुपस्थिति से मतदाता भ्रमित।
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि महापौर/अध्यक्ष के गुलाबी और पार्षद के सफेद बैलेट अलग-अलग गिने गए, लेकिन दोनों को एक ही बॉक्स में डालना मतदाताओं के लिए भ्रम का कारण बना।
मतदाता जागरूकता की कमी उजागर
राज्य स्तर पर कुल मतदान प्रतिशत 63.05% रहा, यानी लगभग 43 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से अधिकांश ने वोट डाले। लेकिन अमान्य वोटों की इतनी बड़ी संख्या ने साफ कर दिया कि मतदाता शिक्षा की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण-शहरी मिश्रित क्षेत्रों में, खासकर धनबाद और गुमला जैसी जगहों पर, EVM से बैलेट पेपर पर स्विच होने और पर्याप्त जागरूकता अभियान न चलने के कारण अमान्य वोट ज्यादा हुए।
