रांची

झारखंड विधानसभा में उठे निविदा मामलों के मुद्दे, मंत्री ने अधिकारियों को चेताया

बजट

Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही अल्पसूचित प्रश्नों के साथ शुरू हुई। प्रश्नकाल में विधायकों ने नगर निकायों में कर्मियों की सेवा नियमावली, परिवहन विभाग में रिक्तियों और पीडब्ल्यूडी की निविदाओं में देरी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए।

नगर पालिका कर्मियों की सेवा नियमावली पर सवाल

विधायक अरूप चटर्जी ने सदन में नगर पालिकाओं में कार्यरत 63 अधिकारियों की सेवा नियमावली पर चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि इन कर्मियों के भविष्य और सेवा शर्तों को लेकर सरकार क्या स्पष्ट कर सकती है। संबंधित मंत्री ने जवाब में कहा कि ये अधिकारी ‘राज्य कर्मी’ की श्रेणी में नहीं आते। ये स्पष्ट रूप से नगरपालिका के कर्मचारी हैं और उन पर नगरपालिका नियमावली ही लागू होती है।

परिवहन विभाग: मोटरयान निरीक्षक पदों की कमी

विधायक चंद्रदेव महतो ने परिवहन विभाग में मोटरयान निरीक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि 2023 में नियुक्तियों के बाद भी पद रिक्त हैं या नहीं। विभाग ने बताया कि 2023 में 46 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जो पूरी कर ली गई है। वर्तमान में कोई पद खाली नहीं है, लेकिन भविष्य की जरूरत को देखते हुए 21 नए पदों के लिए दिसंबर में अधिसूचना भेजी जा चुकी है।

PWD निविदाओं में देरी, मंत्री ने अधिकारियों को चेताया

सदन में सबसे तीखी बहस पीडब्ल्यूडी की निविदाओं को लेकर हुई। विधायक हेमलाल मुर्मू और मथुरा महतो ने आरोप लगाया कि नियमावली के अनुसार निविदाओं का निष्पादन 180 दिनों में होना चाहिए, लेकिन कई निविदाएं एक साल से लंबित हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि देरी हुई है और आश्वासन दिया कि 2024-25 की सभी लंबित निविदाओं को निष्पादित करने का निर्देश दे दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई या रद्द नहीं की गई, तो दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

पुल निर्माण की राशि पर पेच, अध्यक्ष ने सुझाया समाधान

विधायक अमित कुमार ने सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए आवंटित राशि की सीमा (10 करोड़) पर चिंता जताई। उनका कहना था कि इससे बड़े पुलों का निर्माण बाधित हो रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि यदि ग्रामीण विकास विभाग के पास 10 करोड़ से अधिक के पुल बनाने का प्रावधान नहीं है, तो ऐसी योजनाओं को पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर दिया जाए, ताकि निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी या वित्तीय बाधा न आए।

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