सरायके वाखरसावा

फंदे पर लटकी मिली डॉक्टर के इकलौते जवान बेटे की लाश, तफ्तीश में जुटी पुलिस

थाना

Saraikela-Kharsawan : सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा थाना क्षेत्र के लहाकोठी गांव में एक बेहद हृदयविदारक घटना ने सबके दिलों को चीर दिया। इलाके के मशहूर डॉक्टर डॉ. गंगाधर महतो के 27 साल के इकलौते बेटे प्रकाश महतो ने अपने ही घर में फंदे से लाश लटकी हुई मिली। प्रकाश देहरादून में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था और बस पांच दिन पहले ही अपनी पढ़ाई से ब्रेक लेकर पैतृक घर लौटा था। इस अचानक हुई इस घटना से परिवार का तो क्या, पूरे इलाके का दिल टूट गया है।

प्रकाश महतो घर का इकलौता बेटा था। डॉ. गंगाधर महतो जैसे सम्मानित डॉक्टर के बेटे होने के नाते उस पर परिवार की सारी उम्मीदें टिकी हुई थीं। वह देहरादून में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था और भविष्य में एक सफल डॉक्टर बनने की राह पर था। परिजनों के मुताबिक, वह करीब पांच दिन पहले ही देहरादून से लौटा था। घर आकर वह सामान्य रूप से व्यवहार कर रहा था, लेकिन रात में जो हुआ, उसने सबको स्तब्ध कर दिया।

बीती रात काफी देर तक प्रकाश अपने कमरे से बाहर नहीं आया। पहले तो किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब रात गहरा गई और वह बिल्कुल चुप रहा, तो परिवार वालों को चिंता होने लगी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया, पुकारा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार जब दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे, तो जो नजारा सामने आया, वो किसी के भी होश उड़ा देने वाला था। प्रकाश फंदे से लटका हुआ था।

परिजन चीख-पुकार मचाकर रोने लगे। किसी तरह उसे फंदे से उतारा गया और फौरन तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पूरा परिवार सदमे में डूब गया।

घटना की सूचना मिलते ही कांड्रा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घर का पूरा निरीक्षण किया, परिजनों से लंबी पूछताछ की और सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस अब आत्महत्या के पीछे के कारणों की गहराई से जांच कर रही है। अभी तक कोई सुसाइड नोट या स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन जांच जारी है।

एक होनहार युवक, जिसके भविष्य में डॉक्टर बनने की पूरी उम्मीद थी, उसकी ऐसी असमय मौत ने पूरे लहाकोठी और आसपास के इलाके को मातम में डाल दिया है। लोग घर-घर जाकर इस दुख की बात कर रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि “भाई साहब का इकलौता बेटा… इतनी जल्दी कैसे चला गया? क्या बात थी जो इतना बड़ा कदम उठा लिया?” परिवार पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। डॉ. गंगाधर महतो जैसे व्यक्ति, जो दूसरों की जान बचाते थे, आज खुद अपने बेटे को खोकर टूट चुके हैं।

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